धान को बचाएँ दोहरी मार से- शीथ ब्लाइट और बैक्टीरियल ब्लाइट का प्रभावी प्रबंधन

 "समय रहते करें पहचान, धान की फसल को बचाएँ भारी नुकसान से" "धान को बचाएँ दोहरी मार से- शीथ ब्लाइट और बैक्टीरियल ब्लाइट का प्रभावी प्रबंधन "


प्रोफ़ेसर (डॉ.) एसके सिंह एवं डॉ आरके रंजन 

पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ़ प्लांट पैथोलॉजी एवं नेमेटोलॉजी 

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर, बिहार


धान भारतवर्ष की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण खाद्य फसल है, लेकिन इसके उत्पादन में अनेक रोग बाधक बनते हैं। इनमें शीथ ब्लाइट (Sheath Blight) और बैक्टीरियल ब्लाइट (Bacterial Blight) दो प्रमुख रोग हैं, जो न केवल पैदावार को घटाते हैं बल्कि धान की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर डालते हैं। दोनों रोग एक साथ होने पर फसल को 30–60 प्रतिशत तक नुकसान पहुँचा सकते हैं। अतः इन रोगों की पहचान, कारण और प्रभावी प्रबंधन तकनीकों की जानकारी किसान भाइयों के लिए अति आवश्यक है।

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1. शीथ ब्लाइट (Sheath Blight)


कारक जीव – यह रोग Rhizoctonia solani नामक कवक से होता है।

लक्षण –

• आरंभिक अवस्था में पत्तियों की म्यान (शीथ) पर अंडाकार या गोल, भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं।

• बाद में ये धब्बे बढ़कर मिल जाते हैं और पूरी म्यान तथा पत्तियों को घेर लेते हैं।

• गंभीर अवस्था में पौधे सूख जाते हैं और बालियों में दाने नहीं भरते।

प्रकोप के अनुकूल परिस्थितियाँ –

• अधिक तापमान (28–32°C),

• अधिक नमी और

• घनी बुवाई या पानी का ठहराव।

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2. बैक्टीरियल ब्लाइट (Bacterial Blight)


कारक जीव – यह रोग Xanthomonas oryzae pv. oryzae जीवाणु से होता है।

लक्षण –

• पत्तियों के अग्रभाग से पीलेपन और जलने जैसे लक्षण प्रारंभ होते हैं।

• बाद में यह पीला हिस्सा नीचे की ओर बढ़ता है और पूरी पत्ती सूख जाती है।

• पौधे की बालियाँ अधूरी रह जाती हैं और दाने हल्के व चूरेदार बनते हैं।

प्रकोप के अनुकूल परिस्थितियाँ –

• लगातार वर्षा या अधिक आर्द्रता,

• तेज हवा एवं कीटों द्वारा घाव,

• अत्यधिक नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग।

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3. दोनों रोगों से एक साथ होने वाले नुकसान


जब धान की फसल एक ही समय में शीथ ब्लाइट और बैक्टीरियल ब्लाइट से प्रभावित होती है तो:

• पौधों की पत्तियाँ व म्यान तेजी से नष्ट हो जाती हैं।

• प्रकाश संश्लेषण कम होने से पौधे कमजोर पड़ जाते हैं।

• दानों का परिपक्वन ठीक से नहीं होता और उत्पादन में भारी गिरावट आती है।

• किसानों को आर्थिक हानि उठानी पड़ती है।

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4. प्रबंधन की समेकित रणनीति (Integrated Management)


(क) कृषि प्रबंधन (Cultural Practices)


1. प्रतिरोधी किस्मों का चयन – जहाँ संभव हो, रोगरोधी या सहनशील किस्में लगाएँ।

2. फसल चक्र – धान के स्थान पर अन्य फसलें (दलहन, तिलहन) लगाकर रोग के जीव को मिट्टी में कम किया जा सकता है।

3. समुचित दूरी पर बुवाई – अधिक घनी बुवाई से नमी बढ़ती है, जिससे रोगों का प्रकोप होता है।

4. संतुलित उर्वरक प्रयोग – नाइट्रोजन की अधिक मात्रा से रोगों की तीव्रता बढ़ती है। अतः संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटाश का प्रयोग करें।

5. खेत की स्वच्छता – संक्रमित अवशेषों को नष्ट करें और खेत को साफ-सुथरा रखें।

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(ख) जैविक प्रबंधन (Biological Control)


1. ट्राइकोडर्मा (Trichoderma harzianum / viride) का प्रयोग – बीज उपचार व मिट्टी में प्रयोग से Rhizoctonia solani का नियंत्रण संभव है।

2. पीजीपीआर बैक्टीरिया (PGPR Bacteria) – कुछ लाभकारी जीवाणु (जैसे Pseudomonas fluorescens) पत्तियों पर छिड़काव करने से बैक्टीरियल ब्लाइट की तीव्रता कम होती है।

3. जैव-उर्वरक व जैव-कीटनाशक – नियमित प्रयोग से पौधों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

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(ग) रासायनिक प्रबंधन (Chemical Control)


1. शीथ ब्लाइट नियंत्रण हेतु

o हेक्साकोनाजोल (Hexaconazole 5EC) @ 2 मिली/लीटर पानी का छिड़काव करें।

o आवश्यकता पड़ने पर 10–12 दिनों के अंतराल पर दूसरा छिड़काव करें।


2. बैक्टीरियल ब्लाइट नियंत्रण हेतु


o कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Copper oxychloride 50WP) @ 3 ग्राम/लीटर पानी का छिड़काव करें+ स्ट्रेप्टोसाइक्लिन (Streptocycline) 0.5 मिलीग्राम/लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना लाभकारी है।

o रोग की शुरुआत होते ही छिड़काव करें और आवश्यकता अनुसार दोहराएँ।

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(घ) समेकित रोग प्रबंधन (IPM Approach)


• खेत में रोगों की नियमित निगरानी करें।

• रोग के लक्षण दिखते ही प्रारंभिक स्तर पर ही प्रबंधन उपाय अपनाएँ।

• जैविक एवं रासायनिक विधियों का संयोजन करें।

• उचित जल प्रबंधन रखें – खेत में अनावश्यक पानी न ठहरने दें।

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5. किसानों के लिए उपयोगी सुझाव


• बीजोपचार को अनिवार्य बनाएं।

• खेतों में पौधों की संख्या संतुलित रखें।

• रोग प्रकोप के समय खेत में आने-जाने वाले मजदूरों और उपकरणों की स्वच्छता का ध्यान रखें ताकि संक्रमण न फैले।

• प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से नवीनतम तकनीकों की जानकारी लेते रहें।

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6. अंत मे ......


धान की खेती में शीथ ब्लाइट और बैक्टीरियल ब्लाइट दो बड़े रोग हैं, जिनसे उत्पादन एवं गुणवत्ता दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इन रोगों से बचाव हेतु किसानों को केवल रासायनिक उपायों पर निर्भर न रहकर कृषि, जैविक और रासायनिक सभी उपायों को सम्मिलित रूप से अपनाना चाहिए। समेकित रोग प्रबंधन (IPM) ही दीर्घकालीन और टिकाऊ समाधान है, जिससे न केवल धान की उपज बढ़ेगी बल्कि किसानों की आय भी सुरक्षित रहेगी।




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